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मरवाही वनमण्डल में मनरेगा घोटाला: मुख्य आरोपी सुरक्षित, छोटे कर्मचारी बने बलि का बकरा !

मरवाही वनमण्डल में मनरेगा घोटाला: मुख्य आरोपी सुरक्षित, छोटे कर्मचारी बने बलि का बकरा !

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।मरवाही वनमंडल के बहुचर्चित मनरेगा घोटाले में जहाँ करोड़ों रुपये की वसूली और FIR की अपेक्षा थी, वहाँ कार्रवाई के नाम पर लीपापोती और अधिकारियों की ताजपोशी जैसे हालात सामने आए हैं। इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामला चर्चित फर्म के प्रॉपाइटर बॉबी शर्मा से जुड़ा है, जिसे मनरेगा स्वीकृत कार्यों में बिना वनकर्मियों और अधिकारियों के हस्ताक्षर के ही फर्जी ऑनलाइन FTO जारी करवाने के मुख्य आरोपी के रूप में लंबे समय से देखा जा रहा है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों की मदद से विभाग में नौकरी पाने वाले रामजी नामदेव के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की राशि डीएफओ कार्यालय की DSC से पास कराई गई और राशि सीधे अपनी फर्म के खाते में जमा करा ली गई। शिकायतों और विधानसभा प्रश्न के बाद भी विभाग ने मुख्य आरोपियों के बजाय कुछ वनकर्मियों को ही कार्रवाई का निशाना बनाया। तत्कालीन एसडीओ डिंडोरे का डिमोशन, कुछ कर्मचारियों का निलंबन व वेतनवृद्धि रोकना—बस यही “कार्रवाई” दिखाई गई। जबकि तत्कालीन डीएफओ राकेश मिश्रा, संजय त्रिपाठी, दिनेश पटेल, सशि कुमार और रौनक गोयल के खिलाफ किसी भी कठोर कदम का अभाव लोगों में सवाल पैदा कर रहा है।घोटाले के बाद वनकर्मियों के दबाव में बॉबी शर्मा द्वारा जल्दबाज़ी में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता भी इतनी कमजोर रही कि कुछ ही दिनों में सारे निर्माण ध्वस्त होने की कगार पर पहुँच गए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
जब मनरेगा नियम स्पष्ट रूप से FIR की अपेक्षा करते हैं, तब करोड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड बॉबी शर्मा, रामजी नामदेव और तत्कालीन डीएफओ पर अब तक आपराधिक मामला क्यों दर्ज नहीं हुआ ? शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल FIR, कठोर वसूली कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कदम उठाने की मांग की है।
वहीं जिला पंचायत CEO, जीपीएम से उम्मीद जताई जा रही है कि वे पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच तेज़ करें।वसूली आदेश जारी होने के बावजूद आज तक एक रुपये की भी रिकवरी क्यों नहीं हुई ? यह प्रश्न अब जनता के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है !

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